Market Updates

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1) Swan Energy share:

अल्बुला इन्वेस्टमेंट फंड ने ओपन मार्केट ट्रांजैक्शन के जरिए 157 करोड़ रुपये में स्वान एनर्जी के शेयर बेच दिए हैं। इसके खरीदार बंधन म्यूचुअल फंड (एमएफ), सैमको एमएफ, बीएनपी पारिबा आर्बिट्रेशन, सोसाइटी जेनरल और रेजोनेंस अपॉर्चुनिटीज फंड हैं। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के पास उपलब्ध ब्लॉक डील डेटा के मुताबिक अल्बुला इन्वेस्टमेंट फंड ने स्वान एनर्जी में 1.14 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर 30.24 लाख शेयर बेचे।


किस कीमत पर हुई डील:
प्रत्येक शेयर का निपटान औसतन 519.90 रुपये की कीमत पर किया गया, जिससे डील का प्राइस 157.22 करोड़ रुपये हो गया। इस बीच, बीएसई पर स्वान एनर्जी के शेयर 7 प्रतिशत बढ़कर 566.55 रुपये प्रति शेयर तक पहुंच गया। यह शेयर के 52 हफ्ते का हाई भी है। 28 मार्च 2023 को शेयर की कीमत 193 रुपये थी। यह शेयर के 52 हफ्ते का लो लेवल है।
अनिल अंबानी की कंपनी का लिया कंट्रोल
हाल ही में स्वान एनर्जी ने कहा कि उसने औपचारिक रूप से अनिल अंबानी की रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग का प्रबंधन नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। कंपनी दिवाला समाधान प्रक्रिया के तहत विजेता बोलीदाता के रूप में उभरी थी। रिलायंस नेवल का अधिग्रहण जहाज निर्माण, जहाज मरम्मत और भारी निर्माण उद्योग में कंपनी के प्रवेश का प्रतीक है। स्वान ग्रुप की कपड़ा, रियल एस्टेट, तेल और गैस और पेट्रोकेमिकल्स और जहाज निर्माण में उपस्थिति है।


2100 करोड़ रुपये की बोली
स्वान एनर्जी की इकाई हैजल इन्फ्रा ने रिलायंस नेवल के लिए 2100 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी। हैजल इन्फ्रा में स्वान एनर्जी की 74 प्रतिशत हिस्सेदारी है। शेष 26 प्रतिशत हिस्सेदारी हैजल मर्केंटाइल के पास है। इसमें स्वान एक रणनीतिक निवेशक है। रिलायंस नेवल के अधिग्रहण के साथ कंपनी पोत निर्माण, पोत मरम्मत आदि के क्षेत्र में दस्तक देने जा रही है। बता दें कि शेयर बाजार में रिलायंस नेवल का ट्रेडिंग लंबे समय से बंद है।


2) Power Stock:
सरकारी बिजली उत्पादन कंपनी एसजेवीएन लिमिटेड (SJVN Ltd) ने बड़ा बिजनेस अपडेट दिया है. एसजेवीएन की सब्सिडियरी एसजेवीएन ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (SJVN Green Energy Ltd) ने राजस्थान के बीकानेर की 1,000 मेगावाट क्षमता की परियोजना से 200 मेगावाट सौर ऊर्जा की आपूर्ति के लिए उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किया है. एसजेवीएन ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (SGEL) के माध्यम से यूपीसीएल के साथ पावर यूजेज एग्रीमेंट (PUA) पर हस्ताक्षर किए हैं. बता दें कि मिनीरत्न (Miniratna) कंपनी SJVN के शेयर ने 6 महीने निवेशकों को 100 फीसदी रिटर्न दिए हैं.


अप्रैल 2024 तक चालू होगा प्रोजेक्टकंपनी सौर परियोजना एसजेवीएन द्वारा राजस्थान में एसजीईएल के माध्यम से भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (IREDA) की सीपीएसयू योजना के तहत विकसित की जा रही है. अंडर कंसट्रक्शन प्रोजेक्टस का डेवलपमेंट कॉस्ट 5,491 करोड़ रुपये है. इसके अप्रैल 2024 तक इसके चालू होने की योजना है. प्रोजेक्टस से पैदा होने वाली बिजली का उपयोग सरकारी संस्थाओं द्वारा सीधे या वितरण कंपनियों के माध्यम से किया जाएगा.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जनवरी 2023 में बीकानेर सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी थी. इस प्रोजेक्ट से पहले वर्ष में 2,455 मिलियन यूनिट और 25 वर्षों की अवधि में कुल लगभग 56,838 मिलियन यूनिट पैदा होने की उम्मीद है, जबकि कार्बन उत्सर्जन में 27,85,077 टन की कमी आएगी.


SJVN SHARE PRICE HISTORY
एसजेवीएन (SJVN Share Price) के शेयर ने निवेशकों धुआंधार रिटर्न दिया है. एक महीने में शेयर 12 फीसदी, 6 महीने में 100 फीसदी और एक वर्ष में 175 फीसदी का शानदार रिटर्न दिया है. 5 जनवरी 2024 को शेयर 94.50 रुपये के स्तर पर बंद हुआ.


मिल सकता है 32% तक रिटर्नJM फाइनेंशियल के आशीष चतुरमोहता ने अगले 9-12 महीने के लिहाज से SJVN में निवेश की सलाह दी है. उन्होंने शेयर का टारगेट प्राइस 120 रुपये दिया है. यह टारगेट करीब 30 फीसदी ज्यादा है. रिन्यूएबल एनर्जी को लेकर सरकार का अग्रेसिव प्लान है. यह कंपनी हाइड्रो पावर, विंड पावर और सोलर पावर में कारोबार करती है. कंपनी के पास पर्याप्त कैश है. आने वाले समय में इसकी री-रेटिंग संभव है.


वहीं, ब्रोकिंग फर्म मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल (Monarch Networth Capital) ने एसजेवीएन (SJVN Share Price) के शेयर में खरीदारी की सलाह दी है. ब्रोकरेज ने शेयर का टारगेट प्राइस 125 रुपये रखा है. करंट प्राइस से आगे 32 फीसदी रिटर्न मिल सकता है. ब्रोकरेज ने कहा, एसजेवीएन के मजबूत फंडामेंटल्स को हाई प्लांट उपलब्धता का समर्थन मिला है. इस सेगमेंट के अन्य कंपनियों की तुलना में बेहतर प्रॉफिट मार्जिन है.


3) NEWS:
शेयर बाजार में कुछ दिनों पहले ही IREDA, सेलो वर्ल्ड, होनासा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और सिग्नेचर ग्लोबल की लिस्टिंग हुई है। अब ये स्टॉक्स MSCI स्मॉलकैप इंडेक्स में जगह बनाने वाले शीर्ष दावेदारों में से हैं। यह बात नुवामा अल्टरनेटिव एंड क्वांटिटेटिव रिसर्च की एक रिपोर्ट में कही गई है। MSCI 13 फरवरी को आधिकारिक घोषणा करेगा। एडजस्टमेंट्स 29 फरवरी को होने वाले हैं।
नुवामा के अनुसार, MSCI स्मॉलकैप इंडेक्स में जगह बना सकने वाले अन्य दावेदारों में जय प्रकाश एसोसिएट्स, आरआर काबेल, केपीआई ग्रीन एनर्जी, प्रोटीन ई-गॉव, स्वान एनर्जी, जे कुमार इंफ्राप्रोजेक्ट्स, RattanIndia Power, टाइम टेक्नोप्लास्ट, इथोसा, संदुर मैंगनीज, केसोराम इंडस्ट्रीज, साई सिल्क्स कलामंदिर, फेडबैंक और डीबी रियल्टी शामिल हैं।


पिछले तीन महीनों में इन शेयरों में 10-100 प्रतिशत के बीच तेजी आई है जिससे उनका फ्री फ्लोट-एडजस्टेड मार्केट कैप, MSCI स्मॉलकैप इंडेक्स में शामिल होने के काबिल हो गया है। नुवामा की कैलकुलेशन के अनुसार, IREDA के इंक्लूजन से स्टॉक में 1.1 करोड़ डॉलर का पैसिव इनफ्लो आ सकता है, जबकि अन्य शेयरों में से हर एक में 20-70 लाख डॉलर का निवेश देखने को मिल सकता है।


MSCI और FTSE जैसे वैश्विक सूचकांकों में स्टॉक वेटेज का इंक्लूजन या इसमें बढ़ोतरी, पैसिव फंड्स से इनफ्लो की ओर ले जाती है। इन सूचकांकों से स्टॉक का एक्सक्लूजन, आमतौर पर निवेश की निकासी की ओर ले जाता है। 


MSCI स्टैंडर्ड इंडेक्स की बात करें तो जिंदल स्टेनलेस, BHEL, पंजाब नेशनल बैंक, NMDC और ओबेरॉय रियल्टी, वर्तमान में MSCI स्टैंडर्ड इंडेक्स में शामिल होने के लिए क्वालिफाई कर रहे हैं। नुवामा अल्टरनेटिव एंड क्वांटिटेटिव रिसर्च के प्रमुख अभिलाष पगारिया का कहना है कि इस इंडेक्स में एक बार शामिल होने के बाद, प्रत्येक स्टॉक में 13-15 करोड़ डॉलर का पैसिव इनफ्लो देखा जा सकता है। MSCI स्टैंडर्ड इंडेक्स में शामिल होने के लिए कुछ अन्य मजबूत दावेदार अल्केम लैब्स, प्रेस्टीज एस्टेट्स, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और सोलर इंडस्ट्रीज हैं। लेकिन इसके लिए इनकी कीमत में मौजूदा लेवल्स से 2—6 प्रतिशत की तेजी चाहिए। इसी तरह, शेयरों में 8-20 प्रतिशत की तेजी आने पर डालमिया भारत, एनएचपीसी, जीएमआर एयरपोर्ट्स, एफएसएन ई-कॉमर्स वेंचर्स, केनरा बैंक, मैनकाइंड फार्मा, बॉश और वोडाफोन आइडिया भी MSCI स्टैंडर्ड इंडेक्स में जगह बना सकते हैं।

पगारिया के मुताबिक, अगर फरवरी की घोषणा से पहले इन शेयरों में तेजी नहीं दिखती है, तो वे मई के रिव्यू के लिए जबूत दावेदार हो सकते हैं। MSCI ने फरवरी की घोषणा के लिए कट-ऑफ अवधि 18 से 31 जनवरी के बीच निर्धारित की है। जहां तक एक्सक्लूजन की बात है तो इंद्रप्रस्थ गैस का शेयर मौजूदा बाजार मूल्य से 3-4 प्रतिशत नीचे आने पर इंडेक्स से बाहर हो सकता है। हालांकि फिलहाल यह सुरक्षित है।


अक्टूबर 2020 में भारत की MSCI एमर्जिंग मार्केट इंडेक्स में हिस्सेदारी 8 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 17.1 प्रतिशत हो चुकी है। पिछली रिस्ट्रक्चरिंग में MSCI ने MSCI स्टैंडर्ड इंडेक्स में नौ भारतीय शेयरों को शामिल किया था, जिनमें इंडसइंड बैंक, सुजलॉन एनर्जी, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स और पेटीएम की पेरेंट कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस भी शामिल थे।


4) Unicommerce IPO News:
स्नैपडील के मालिकाना हक वाले SaaS प्लेटफॉर्म ‘यूनिकॉमर्स’ ने प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) के लिए सेबी को आवेदन दिया है। इस आईपीओ में फ्रेश इश्यू नहीं हैं। वहीं, ऑफर फॉर सेल के जरिए 2.98 करोड़ शेयरों की बिक्री होगी। आपको बता दें कि ओला इलेक्ट्रिक, फर्स्टक्राई और मोबिक्विक के बाद यूनिकॉमर्स ने आईपीओ के लिए सेबी के साथ एक ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दायर किया है।


आईपीओ की डिटेल
इस आईपीओ में 1 रुपये के फेस वैल्यू वाले कुल 29,840,486 इक्विटी शेयरों की बिक्री की पेशकश शामिल है। इसमें ऐसवेक्टर लिमिटेड (जिसे पहले स्नैपडील लिमिटेड के नाम से जाना जाता था) के 11,459,840 इक्विटी शेयर शामिल हैं। बता दें कि एसबी इन्वेस्टमेंट होल्डिंग्स (यूके) लिमिटेड के पास एसबी इन्वेस्टमेंट होल्डिंग्स (यूके) लिमिटेड के साथ 2,210,406 इक्विटी शेयर हैं। हाल ही में एंकरेज कैपिटल फंड, माधुरी मधुसूदन, रिजवान कोइता और जगदीश मूरजानी, दिलीप वेलोडी और अन्य सहित निवेशकों के एक समूह ने कंपनी में शेयर हासिल किए हैं। आईआईएफएल सिक्योरिटीज लिमिटेड और सीएलएसए इंडिया प्राइवेट लिमिटेड इस इश्यू के लिए बुक रनिंग लीड मैनेजर हैं।


कंपनी का राजस्व कितना है:
वित्त वर्ष 2023 में यूनिकॉमर्स का राजस्व लगभग 53 प्रतिशत बढ़कर 90 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी का प्रॉफिट 8 प्रतिशत बढ़कर 6 करोड़ रुपये हो गया। ऐसा माना जा रहा है कि यह कंपनी चालू वित्त वर्ष में 120-150 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल करने की राह पर है। इस कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष की तुलना में अपने मुक्त नकदी प्रवाह (एफसीएफ) में 86 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी।


2012 में वजूद में आई कंपनी
बता दें कि गुरुग्राम स्थित कंपनी यूनिकॉमर्स की स्थापना 2012 में हुई थी। साल 2015 में स्नैपडील द्वारा अधिग्रहण किया गया। यह कंपनी D2C ब्रांडों, रिटेल कंपनियों और अन्य ऑनलाइन सेलर के लिए ई-कॉमर्स संचालन के एंड-टू-एंड प्रबंधन को सक्षम बनाती है। इस कंपनी के क्लाइंट फैशन, फुटवियर, ब्यूटी, पर्सनल केयर, एफएमसीजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा एंड मेडिकल, होम, किचन एंड सर्विस, हाउस ऑफ ब्रांड, लॉजिस्टिक एंड इंटरनेशन कैटेगरी के हैं। कंपनियों में इसके क्लाइंट लेंसकार्ट, मामाअर्थ आदि शामिल हैं।


5) IREDA share price:
पिछले साल के सफल आईपीओ की लिस्ट में सरकारी इंड‍िया र‍िन्‍यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (IREDA) का भी नाम है। इस कंपनी ने लिस्टिंग के बाद 100 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न दिया है। बीते 14 दिसंबर को शेयर की कीमत 123.37 रुपये तक पहुंची थी। यह शेयर का ऑल टाइम हाई है। हालांकि, ब्रोकरेज हाउस फिलिप कैपिटल का मानना है कि शेयर में अब गिरावट आने वाली है।


क्या है टारगेट प्राइस
ब्रोकरेज ने इस शेयर के लिए टारगेट प्राइस ₹80 रखते हुए बेचने की सलाह दी। अभी इस शेयर की कीमत 105 रुपये है। इस लिहाज से शेयर की कीमत में 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ सकती है। ब्रोकरेज ने कहा- IREDA को देश में रिन्यूएबल एनर्जी की बढ़ती मांग के कारण वित्त वर्ष 2023-26 में मजबूत ऋण वृद्धि देखने को मिलेगी। हालांकि, मार्जिन पर दबाव और क्रेडिट लागत के सामान्यीकरण के कारण आय वृद्धि, ऋण वृद्धि से मेल खाने की उम्मीद नहीं है। हम बिक्री रेटिंग के साथ कवरेज शुरू कर रहे हैं।


कब हुई थी लिस्टिंग:
बीते 29 नवंबर 2023 को भारतीय एक्सचेंजों पर IREDA के आईपीओ की लिस्टिंग ₹60 प्रति शेयर पर हुई थी। यह कीमत इश्यू प्राइस ₹32 से 87.5 प्रतिशत प्रीमियम है। इस आईपीओ अगले 11 सत्रों तक इसी तरह बढ़ना जारी रखा। बता दें कि रिकॉर्ड हाई ₹123.30 है। यह लिस्टिंग प्राइस से 105.6 प्रतिशत और आईपीओ इश्यू प्राइस से 285.5 प्रतिशत बढ़ गया। पिछले साल दिसंबर में स्टॉक 57.4 फीसदी उछला था।


कंपनी के बारे में
IREDA एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी है। इसकी स्थापना साल 1987 में हुई। यह नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत भारत सरकार का पूर्ण स्वामित्व वाला उद्यम है। पावर फाइनेंसिंग एनबीएफसी में कंपनी के पास पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन के अलावा आरई क्षेत्र के लिए ऋण का सबसे बड़ा हिस्सा है।


6) Tata group Stocks:
टाटा ग्रुप की अधिकतर कंपनियों ने शेयर बाजार में पोजीशनल निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। इन कंपनियों में तेजस नेटवर्क लिमिटेड (Tejas Network Ltd) भी एक है। बीते एक साल के दौरान कंपनी के शेयरों का भाव 46 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुका है। टाटा ग्रुप की इस कंपनी पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट के अनुसार कंपनी के शेयरों का भाव आने वाले वक्त में 1000 रुपये को पार कर सकता है।


2 साल में 100% का रिटर्न
पिछले 3 साल में तेजस नेटवर्क लिमिटेड के शेयरों की कीमतों में 521 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है। वहीं, बीते 2 साल के दौरान यह स्टॉक 100 प्रतिशत का रिटर्न देने में सफल रहा है। हालांकि, शेयर बाजार में कंपनी की यह तेजी पिछले साल जारी नहीं रह पाई। इस दौरान रिटर्न 50 प्रतिशत से भी कम रहा है। बता दें, पिछले 3 महीने में यह स्टॉक 2.78 प्रतिशत गिर चुका है।


शुक्रवार को क्या था भाव?
शुक्रवार को बाजार के बंद होने के समय पर बीएसई में तेजस नेटवर्क लिमिटेड के शेयर का भाव 0.82% की तेजी के साथ 865.15 रुपये के लेवल पर बंद हुआ था। बता दें, आखिरी बार कंपनी ने 2019 में डिविडेंड दिया था। तब योग्य निवेशकों को एक शेयर पर 1 रुपये का फायदा हुआ था।


1000 रुपये को करेगा क्रॉस!
घरेलु ब्रोकरेज हाउस Emkay Global का मानना है कि तेजस नेटवर्क लिमिटेड के शेयरों का भाव 1050 रुपये के लेवल तक जा सकता है। ब्रोकरेज हाउस में इस ‘बाय’ टैग दिया है।
मौजूदा समय में तेजस नेटवर्क लिमिटेड 75 देशों में काम कर रहा है। कंपनी ऑप्टिकल और डाटा नेटवर्किंग प्रोडक्ट्स बनाती है।


7) Olectra Greentech share:
इलेक्ट्रिक बस बनाने वाली कंपनी ओलेक्ट्रा ग्रीनटेक लिमिटेड के शेयर शुक्रवार को अपने एक साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। ट्रेडिंग के दौरान शेयर में 10.70 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 52 सप्ताह के उच्चतम 1,493.50 रुपये पर पहुंच गया। इस मल्टीबैगर शेयर ने अपने एक साल के निचले स्तर 374.35 रुपये से 298.96 प्रतिशत का रिटर्न दे दिया है। बता दें कि पिछले साल 23 फरवरी को शेयर ने 375 रुपये से नीचे के स्तर को देखा था।


इलेक्ट्रिक-बसों की डिलीवरी के लिए ऑर्डर मिलने और हाइड्रोजन बसों के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के साथ साझेदारी के कारण शेयर को बूस्ट मिला है। हाल ही में कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक केवी प्रदीप ने एक इंटरव्यू में बताया- ओलेक्ट्रा के पास वर्तमान में 9000 से अधिक बस ऑर्डर हैं और उसने वित्तीय वर्ष 2023-24 (FY24) की पहली छमाही में 232 बसों की सफलतापूर्वक डिलीवरी की है। कंपनी वित्त वर्ष की दूसरी छमाही के दौरान डिलीवरी संख्या को दोगुना करने के लिए तैयार है।


प्रभुदास लीलाधर के शिजू कूथुपालक्कल ने कहा कि आने वाले दिनों में शेयर 1,570-1,690 रुपये के स्तर तक जा सकता है। इसका आउटलुक मजबूत है। ऐसे में इस स्टॉक में निवेश को बनाए रख सकते हैं। आनंद राठी शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स के जिगर एस पटेल ने कहा कि समर्थन 1,400 रुपये पर और ब्रेकआउट 1,500 रुपये पर होगा। वहीं, टिप्स2ट्रेड्स के एआर रामचंद्रन ने कहा कि ओलेक्ट्रा ग्रीनटेक में तेजी है, लेकिन डेली चार्ट पर 1,548 रुपये के अगले ब्रेकआउट के साथ ओवरबॉट भी किया गया है। निवेशकों को मौजूदा स्तर पर मुनाफा बुक करना चाहिए क्योंकि निकट अवधि में शेयर 1,185 रुपये तक पहुंच सकता है।


कंपनी के बारे में:
शेयरहोल्डिंग पैटर्न की बात करें तो सितंबर 2023 तक कंपनी में प्रमोटरों की 50.02 फीसदी हिस्सेदारी थी। बता दें कि यह मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमईआईएल) की सहायक कंपनी है और भारत में इलेक्ट्रिक बसें बनाती है। ओलेक्ट्रा पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रिब्युशन नेटवर्क के लिए सिलिकॉन रबर/कंपोजिट इंसुलेटर का भारत का सबसे बड़ा निर्माता भी है।


8) STOCK MARKET NEWS :
बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने शुक्रवार को एक नया सर्कुलर जारी किया. इसके अनुसार संस्थागत निवेशकों को ऑर्डर देते समय पहले ही बताना होगा कि लेनदेन शॉर्ट सेलिंग (Short Selling) है या नहीं. आदेश में कहा गया है कि रिटेल निवेशकों को लेनदेन के दिन कारोबारी घंटों के अंत तक इसी तरह का खुलासा करने की इजाजत दी जाएगी. सेबी ने खुदरा और संस्थागत निवेशकों जैसे सभी वर्गों के निवेशकों को शॉर्ट सेल करने की अनुमति दी है, लेकिन बेईमानी को रोकने के लिए कुछ शर्तें भी लगाई हैं.


यह फैसला हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद अडानी समूह के शेयरों में कथित हेरफेर की अदालत की निगरानी में जांच की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के ठीक बाद आया है. पिछले कुछ महीनों में शेयर बाजार में ‘शॉर्ट सेलिंग’ के बढ़ते चलन और उसके बाद होने वाले उतार-चढ़ाव को लेकर चिंताएं सामने आई हैं। ‘शॉर्ट सेलिंग’ का आशय उस शेयर को बेचने से है जो सौदे के समय विक्रेता के पास होता ही नहीं है।


आखिर शॉर्ट सेलिंग होती क्या है?
शेयर बाजार में कम दाम पर शेयर खरीद कर उसे ऊंचे दाम पर बेचने और मुनाफा कमाने के बारे में तो सभी जानते हैं. शॉर्ट सेलिंग के बारे में कम लोग जानते थे, लेकिन जब से हिंडनबर्ग ने अडानी ग्रुप के शेयरों में शॉर्ट सेलिंग की थी, तब से यह टर्म काफी पॉपुलर हो गया है. जिस तरह आप पहले शेयर खरीदते हैं और फिर उसे बेचते हैं, उसी तरह शॉर्ट सेलिंग में पहले शेयर बेचे जाते हैं और फिर उन्हें कम कीमत पर खरीदा जाता है. इस तरह बीच का जो भी अंतर यानी मार्जिन आता है, वही आपकी कमाई होती है.


एक उदाहरण से समझते हैं शॉर्ट सेलिंग को
मान लीजिए आज शेयर बाजार में एक कंपनी के शेयर की कीमत 1000 रुपये है. तमाम हालात और कंपनी के वित्तीय नतीजे देखकर या फिर किसी पॉलिसी में बदलाव के चलते आपको लग रहा है कि अह शेयर के दाम गिर सकते हैं. ऐसे में आप 1000 रुपये पर शेयर में शॉर्ट सेलिंग कर सकते हैं. इसके तहत आपको 1000 रुपये पर शेयर बेचना (Sell) होगा और फिर जब उसके दाम कम हो जाएं तो उसे खरीदना (Buy) होगा. मान लीजिए कि शेयर के दाम गिरकर 900 रुपये हो जाते हैं. ऐसे में दोनों के बीच का 100 रुपये का अंतर ही आपका मुनाफा होगा. हालांकि, इसमें से कुछ पैसे टैक्स और कमीशन में कटेंगे, लेकिन बाकी सब आपका मुनाफा होगा.


कुछ बातों का रखना होगा ध्यान
शॉर्ट सेलिंग में यह बात ध्यान रखनी होगी कि कैश मार्केट में आप शॉर्ट सेलिंग सिर्फ इंट्राडे में ही कर सकते हैं. आसान भाषा में समझें तो अगर आपको किसी कंपनी के शेयर शॉर्ट सेल करने हैं तो आपको उन्हें बेचने के बाद शाम को बाजार बंद होने तक खरीदना होगा. अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो वह शेयर बाजार बंद होने से कुछ समय पहले खुद ही बंद हो जाएंगे. हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखने की है कि इसमें मुनाफा तो लिमिटेड होता है, लेकिन नुकसान अनलिमिटेड हो सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि किसी शेयर के दाम ज्यादा से ज्यादा गिरकर 0 हो सकते हैं, लेकिन अगर आप उसके दाम बढ़ने की करें तो वह बढ़ते-बढ़ते कितने भी हो सकते हैं.


सवाल ये कि बिना खरीदे कोई शेयर बेचें कैसे?
जो लोग शॉर्ट सेलिंग के बारे में नहीं जानते हैं, उनका पहला सवाल यही होता है कि आखिर बिना खरीदे किसी शेयर को कैसे बेचा जा सकता है? सवाल जायज भी है, आप उस चीज को कैसे बेच सकते हैं, जो आपके पास है ही नहीं. दरअसल, ट्रेडिंग में यह सुविधा ब्रोकर्स की तरफ से मिलती है. तो जब भी आप कोई शेयर शॉर्ट सेल करते हैं, वह दरअसल आपके ब्रोकर के पास का शेयर बिकता है. इसके लिए आपका ब्रोकर तुरंत ही आपके खाते से शेयर की वैल्यू जितने पैसे काट भी लेता है. बता दें कि अगर आपका नुकसान तेजी से बढ़ता जाता है तो आपको ब्रोकर की तरफ से इस बात का नोटिफिकेशन भेजा जाता है कि आपको मार्जिन बढ़ाने की जरूरत है. ध्यान रहे कि ऑप्शन सेलिंग में आपका नुकसान बहुत ही लिमिटेड होता है, लेकिन कैश मार्केट में की जाने वाली शॉर्ट सेलिंग में नुकसान बहुत ज्यादा हो सकता है. हालांकि, भारत में सिर्फ इंट्राडे में ही शॉर्ट सेलिंग हो सकती है, इसलिए नुकसान पर काफी हद तक लगाम रहती है.


शॉर्ट सेलिंग से निवेशकों ने की है मोटी कमाई
भले ही दिवंगत राकेश झुनझुनवाला हों या फिर राधाकृष्ण दमानी, तमाम लोगों ने शॉर्ट सेलिंग से तगड़ी कमाई की है. 1990 के दशक में हर्षद मेहता ने शेयर बाजार को मैनुपुलेट करते हुए एसीसी के शेयरों के दाम बहुत ज्यादा चढ़ा दिए थे. जब पोल खुली तो शेयरों में तगड़ी गिरावट आई. इस गिरावट में शेयर बाजार में काम करने वाले तमाम ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स ने शॉर्ट सेलिंग के जरिए मुनाफा कमाया था. बता दें कि हर्षद मेहता ने एसीसी के शेयरों को 200 रुपये से बढ़ाकर 9000 रुपये तक पहुंचा दिया था.


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